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Azadi Podcast

Centre for Civil Society

Azadi podcast is an initiative of Centre for Civil Society, a New Delhi based think tank. It aims to bring Indian public policy discussions to Hindibhasis.
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Top 10 Azadi Podcast Episodes

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सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा प्रस्तुत आज़ादी पॉडकास्ट के इस एपिसोड में फाउंडेशन फॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर देवाशीष देशपांडे के साथ ‘कृषि सब्सिडी की तार्किकता’ की पड़ताल कर रहे हैं सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के रिसर्च मैनेजर व होस्ट सुधांशु नीमा। इस पॉडकास्ट में किसानों को सब्सिडी वस्तुओं के रूप में प्रदान करने की बजाए डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के माध्यम से प्रदान किए जाने की संभावनाओं और इसकी जटिलताओं पर विस्तार से चर्चा की गई है।

और जानकारी के लिए जाएँ ccs.in पर।

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In this episode of the Azadi Podcast, presented by Centre for Civil Society, host Sudhanshu Neema discusses rationalisation of subsidies for farmers with Devashish Deshpande, Senior Programme Manager at the Foundation for Economic Development. They explore the possibility of moving from in-kind subsidies to direct cash transfer to farmers and the complexities involved therein.

For more information, visit ccs.in

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सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के द्वारा प्रस्तुत, आजादी पॉडकास्ट की इस कड़ी में हम चर्चा कर रहे हैं भारत में बढ़ती बेरोजगारी के मुख्य कारणों पर। इस विषय पर बात करने के लिए हमारे साथ मौजूद हैं हमारे आज के मेहमान यज़द जल। यज़द के साथ बातचीत कर रहे हैं होस्ट सुधांशु नीमा।

यज़द जल, सेंटर फॉर सिविल सोसायटी की एकेडमी टीम के डायरेक्टर हैं और रोजगार संबंधी नीतियों के जानकार हैं ,और इस विषय पर किए गए अपने शोध कार्यों के लिए जाने जाते हैं। होस्ट सुधांशु, सेंटर फॉर सिविल सोसायटी की एडवोकेसी टीम में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं।

और जानकारी के लिए जाएँ ccs.in पर।

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In this episode of the Azadi Podcast, presented by Centre for Civil Society, host Sudhanshu Neema speaks to Yazad Jal as they dig deeper to understand the main reasons behind increasing unemployment in India.

Sudhanshu Neema is a manager in the Advocacy Team, CCS & Yazad Jal, along with being the Director, Academy Team, CCS, is also known for his research on employment policies.

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सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के द्वारा प्रस्तुत, आजादी पॉडकास्ट की इस कड़ी में चर्चा परिचर्चा का विषय है भारतीय संविधान के सामान्य सिद्धांत और अनुच्छेद 14। इस पॉडकास्ट में होस्ट कुमार आनंद, एडवोकेट प्रशांत नारंग से विमर्श कर रहे हैं कि क्यों कानून सामान्य होने चाहिए ना कि विशिष्ट। वे यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि कुछ विशेष परिस्थितियों में विशिष्ट कानूनों की अनुमति दी भी जाती है तो वे परिस्थितियां कौन सी हैं? विमर्श के दौरान अन्य जरूरी मुद्दों के साथ यह भी जानने का प्रयास भी किया जा रहा है कि 'धारा 377' एक सामान्य कानून है या विशिष्ट!

कुमार, सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के एडवोकेसी टीम को लीड करते हैं जबकि प्रशांत सेंटर फॉर सिविल सोसायटी की रिसर्च टीम में एसोसिएट डाइरेक्टर हैं।

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In this episode of the Azadi Podcast, presented by Centre for Civil Society, host Kumar Anand speaks to Prashant Narang about the Generality Principle and Article 14 of the Indian Constitution. They talk about why laws should be general and not specific and under what conditions can specific laws be permitted. They also examine whether Section 377 is a general law or a specific law, and much more.

Kumar leads the Advocacy team at Centre for Civil Society and Prashant is the Associate Director, Research at CCS.

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काफी इंतजार के बाद पिछले वर्ष राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2019 ड्राफ्ट आखिरकार जारी हो ही गया। यह ड्राफ्ट 484 पृष्ठों का व्यापक दस्तावेज है जिसे तैयार करने में चार वर्षों से अधिक का समय लगा।

सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के द्वारा प्रस्तुत, आज़ादी पॉडकास्ट के इस एपिसोड में एनईपी को लेकर निजी स्कूलों के अखिल भारतीय संगठन निसा (नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस) के प्रेसिडेंट कुलभूषण शर्मा से बातचीत कर उनकी राय जान रहे हैं होस्ट अविनाश चंद्र जो देश के पहले हिंदी उदारवादी वेबपोर्टल azadi.me के संपादक हैं।

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After over four years of preparation, the 484-page draft of the National Education Policy (NEP) was finally released in 2019. But would it change the education landscape in the country?

In this episode of the Azadi Podcast, presented by Centre for Civil Society, host Avinash Chandra, Editor, Azadi.me, discusses the nuances of the NEP with Kulbhushan Sharma, President of the National Independent Schools Alliance, to assess its impact on the ground.

Listen now!

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सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी द्वारा प्रस्तुत, अज़ादी पोडकास्ट के इस एपिसोड में होस्ट अमित चंद्रा पिछले सप्ताह की बातचीत को आगे बढ़ाते हैं भुवना आनंद और अभिषेक रंजन के साथ। वे सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा किए गए हस्तक्षेपों पर चर्चा करते हैं।

अभिषेक रंजन और अमित चंद्रा ने शिक्षा के विषय पर पिछले दस वर्षो में ज़मीनी स्तर पर काफी काम किया है। भुवना आनंद सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के रिसर्च डिपार्टमेंट की डायरेक्टर हैं।

और जानकारी के लिए जाएँ ccs.in पर।

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In this episode of the Azadi podcast, presented by Centre for Civil Society, host Amit Chandra & guests Bhuvana Anand & Abhishek Ranjan take forward their conversation from last week on the Delhi School Education System.

They discuss interventions made by the #DelhiSarkaar to improve learning outcomes. They also go on to discuss the agenda of the coming new government in Delhi based on the analysis of all efforts made by the current Delhi government.

Amit Chandra & Abhishek Ranjan have been working in the education sector on a grassroots level for the last ten years. Bhuvana Anand is the Director, Research at Centre for Civil Society.

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भारत में स्कूली शिक्षा की स्थिति बेहाल हो गई है। दिल्ली सरकार ने पिछले कुछ सालों में शिक्षा में सुधार लाने के लिए कुछ प्रयास किए हैं। सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के द्वारा प्रस्तुत आज़ादी पॉडकास्ट के इस एपिसोड में, होस्ट अमित चंद्रा चर्चा करते हैं भुवना आनंद और अभिषेक रंजन के साथ, दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के बारे में।

अभिषेक रंजन और अमित चंद्रा ने शिक्षा के विषय पर पिछले दस वर्षो में ज़मीनी स्तर पर काफी काम किया है। भुवना आनंद सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के रिसर्च डिपार्टमेंट की डायरेक्टर हैं।

ये हैं कुछ प्रासंगिक रिपोर्ट्स:

1. भारत में क-१२ शासन की संरचना(सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के द्वारा प्रस्तुत): https://ccs.in/sites/default/files/Anatomy-of-K-12-Governance-in-India.pdf
2. दिल्ली में पब्लिक स्कूलों की स्तिथि (प्रजा द्वारा प्रस्तुत): https://www.praja.org/praja_docs/praja_downloads/Education%20White%20Paper%202019.pdf

और जानकारी के लिए जाएँ ccs.in पर।

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The state of school education has become deplorable in India. Government of Delhi has made some efforts to improve its education system. In this episode of the Azadi Podcast, presented by Centre for Civil Society, host Amit Chandra speaks to Abhishek Ranjan & Bhuvana Anand as they try to dig deeper into a few of these interventions to derive key insights into improving the current state of education not only for Delhi but the entire nation.

Amit Chandra & Abhishek Ranjan have been working in the education sector on a grassroots level for the last ten years. Bhuvana Anand is the Director, Research at Centre for Civil Society.

Here are some relevant reports:

1. Anatomy of K-12 Governance in India (by Centre for Civil Society): https://ccs.in/sites/default/files/Anatomy-of-K-12-Governance-in-India.pdf
2. State of Public (School) Education in Delhi (by Praja): https://www.praja.org/praja_docs/praja_downloads/Education%20White%20Paper%202019.pdf

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कृषि कर्ज माफी का जो आंकड़ा है वह उद्योग जगत के कुल एनपीए के बराबर पहुंच गया है। यानि कि पिछले दस वर्षों में केंद्र व राज्य स्तर पर किसानों की कर्ज माफी के रूप में कुल 4.7 लाख करोड़ रूपए माफ किए गए हैं। हालांकि इतना सब होने के बावजूद किसानों की समस्या एक लाइलाज रोग की तरह अब भी मौजूद है। आए दिन किसान धरना दे रहे हैं या मौत को गले लगाने को मजबूर हो रहे हैं। आखिर क्या है किसानों की समस्याओं का इलाज!

आजादी पॉडकास्ट के इस एपिसोड में होस्ट अविनाश चंद्रा, संपादक, azadi.me और हरवीर सिंह, संपादक, आउटलुक पत्रिका, बातचीत करते हैं कृषि में संकट और उसके समाधान के बारे में।

The figure for farm loan waivers has reached equal to the total NPA of the industries. This means that in the last ten years, a total of Rs 4.7 lakh crore has been waived off as loan waiver of farmers at the central and state level. However, despite all of this, the problems of the farmers continue to persist as an incurable disease. Often, farmers have to go for protests and agitations or have to embrace death. So, what is the solution to these problems of the farmers?

In this episode of Azadi Podcast, host Avinash Chandra, Editor, Azadi.me & talks to Harvir Singh, Editor, Outlook Magazine, about the crisis in agriculture and about real and practical solutions to it.

Listen to this episode on:

Spotify: https://open.spotify.com/show/0Y5yQgjAIQOUWSg4mT0ajH

Pocket Casts: https://pca.st/cb7a3osi

Soundcloud: https://soundcloud.com/azadipodcast

& Anchor: https://anchor.fm/azadipodcast

Click here to listen to our last episode: रेहड़ी और आजीविका

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आस पास के रेहड़ी पटरी व्यवसायियों के पास आपका आना जाना अवश्य रहता होगा। रेहड़ी पटरी वाले ताजे फल-सब्जियों से लेकर हल्के फुल्क नाश्ते तक की हमारी दिन प्रतिदिन की सारी जरूरतों को पूरी करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण अपनी आजीविका को लेकर प्रतिदिन उन्हें कितने जोखिमों का सामना करना पड़ता है?

आज़ादी पॉडकास्ट की इस आरंभिक कड़ी में रेहड़ी पटरी व्यवसायियों की आजीविका और इससे संबंधित नीतिगत मुद्दे पर कुमार आनंद ने प्रशांत नारंग से बातचीत की। प्रशांत नारंग सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हैं और वर्तमान में सेंटर फॉर सिविल सोसायटी में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर कार्यरत हैं।

स्टेट कॉम्पलायंस इंडेक्स 2017 को पढ़ने के लिए क्लिक करें: ccs.in/sites/default/files/r...liance-report2017.pdf

रोजगार के आंकड़ों में फेरी वालों की संख्या को अवश्य समाहित करे मोदी सरकार, लेकिन उनके व्यवसाय की सुगमता में सुधार भी करे : theprint.in/opinion/modi-govt-w...usiness-too/252687/

You surely visit your local street vendor time & again. From fresh vegetables to a quick snack, street vendors fulfill all our daily needs. But do you know the kind of risk they face every day due to policy uncertainty?

In this episode of the Azadi Podcast, host Kumar Anand speaks with Prashant Narang to discuss livelihood issues of street vendors and related policies. Prashant Narang is an advocate currently working as an Associate Director at the Centre for Civil Society.

Read the State Compliance Index 2017 (for Street Vendors Act 2014)here: ccs.in/sites/default/files/r...liance-report2017.pdf

Modi govt will count hawkers in job data but must improve their Ease of Doing Business too: theprint.in/opinion/modi-govt-w...usiness-too/252687/

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सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा प्रस्तुत आज़ादी पोडकास्ट के इस एपिसोड में आज हम चर्चा करेंगे बहुचर्चित कृषि सुधार कानून 2020 पर। हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि इन सुधारात्मक कानूनों के बारे में आम किसान क्या सोचता है और क्या वास्तव में किसानों का कुछ भला होगा? इस महत्वपूर्ण विषय को होस्ट कर रहे हैं आज़ादी.मी के संपादक अविनाश चंद्र और वक्ता हैं गुनवंत पाटिल। गुनवंत पाटिल किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं और पेशे से इंजीनियर और पैशन से फिलांथ्रोपिस्ट हैं। पाटिल किसानों के सबसे बड़े संगठन शेतकरी संगठन से जुड़े हैं और स्वतंत्र भारत पक्ष नामक राजनैतिक संगठन के जनरल सेक्रेटरी भी हैं।

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In this episode of the Azadi Podcast, presented by the Centre for Civil Society, we are exploring the much discussed Agriculture Reform Bill 2020. We would also try to explore views of a common farmer about the newly introduced law. Avinash Chandra; editor, www.azadi.me is the host of this podcast and the guest is Gunvant Patil, an engineer by profession and a philanthropist by passion. He is a farmer leader and associated with farmer's association Shetkari Sangathan. Also, he is general secretary of Swatantra Bharat Paksh; a political party.

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